जापान में थोक महंगाई दर तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंची।
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जापान में थोक (औद्योगिक) महंगाई में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की गई है। क्योडो न्यूज़ के अनुसार, पिछले महीने देश का थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index) साल-दर-साल आधार पर 6.3% तक पहुंच गया, जो पिछले तीन वर्षों का सबसे उच्च स्तर है। इस तेज़ मुद्रास्फीति दबाव का मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहा सशस्त्र संघर्ष रहा, जिसने आयातित वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की लागत को बढ़ा दिया। इसके मुकाबले अप्रैल में थोक महंगाई 5.3% थी। कारखाना स्तर की कीमतों में इस तेज़ वृद्धि ने निवेशकों की यह उम्मीद मजबूत कर दी है कि जापान का केंद्रीय बैंक (Bank of Japan) जल्द ही और सख्त मौद्रिक नीति अपना सकता है।
समष्टि आर्थिक स्थिति ने विशेषज्ञों के बीच गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं। बैंक ऑफ जापान के पूर्व बोर्ड सदस्य Makoto Sakurai ने चेतावनी दी है कि टोक्यो अपने ऐतिहासिक गलतियों को दोहरा सकता है, जिससे देश वर्षों तक आर्थिक ठहराव (stagnation) में फंस सकता है। उनके अनुसार, बढ़ती कीमतों और धीमी जीडीपी वृद्धि के बीच एशियाई अर्थव्यवस्था स्टैगफ्लेशन के करीब पहुंच रही है। साकुराई ने जोर देकर कहा कि यदि जून की बैठक में ब्याज दरों में तुरंत वृद्धि नहीं की गई, तो नियामक अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति से पीछे रह जाएगा और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण खो सकता है।
स्थिति को और गंभीर बनाने वाला कारक राष्ट्रीय मुद्रा येन की कमजोरी है, जिससे आयात लागत और बढ़ रही है। विदेशी मुद्रा बाजार में तनाव मई के अंत में चरम पर पहुंच गया, जब जापानी अधिकारियों को कमजोर येन को सहारा देने के लिए बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप करना पड़ा। टोक्यो ने मुद्रा की रक्षा के लिए रिकॉर्ड 73.6 अरब डॉलर खर्च किए, लेकिन वैश्विक ऊर्जा कीमतों के उच्च स्तर के कारण अर्थव्यवस्था पर मूलभूत दबाव अब भी बना हुआ है।