स्विस विश्लेषकों का अनुमान: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बाद सोने में तेजी आ सकती है।
सोने की कीमतें जून के बाद पहली बार 4,250 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे लंबे समय से चल रही सीमित दायरे की चाल (साइडवेज रेंज) टूट गई है। इस तकनीकी ब्रेकआउट के बीच स्विस बैंक यूबीएस (UBS) के रणनीतिकारों ने अपना वैश्विक अनुमान दोहराया है। उनका मानना है कि कीमती धातु 2027 की पहली छमाही तक 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जो मौजूदा स्तरों से लगभग 18% की बढ़त दर्शाता है।
विश्लेषकों के अनुसार हालिया तेजी का मुख्य कारण चीनी संस्थागत निवेशकों की बड़ी खरीदारी और सोने पर आधारित एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में फिर से बढ़ता निवेश है। इसके अलावा, जापानी येन को सहारा देने के लिए अमेरिका और जापान के संयुक्त प्रयासों ने भी समर्थन दिया। इससे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में बड़े पैमाने पर बिकवाली का जोखिम कम हुआ और कीमती धातुओं के बाजार को फायदा मिला।
यूबीएस का आशावादी दृष्टिकोण तीन संरचनात्मक कारकों पर आधारित है।
वास्तविक बॉन्ड यील्ड में गिरावट: बैंक को उम्मीद है कि सरकारी बॉन्ड की वास्तविक यील्ड घटेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई में नरमी आने से फेडरल रिजर्व इस वर्ष ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा, लेकिन 2027 में दरों में कटौती फिर शुरू कर सकता है, जिससे बिना ब्याज देने वाली संपत्तियां जैसे सोना अधिक आकर्षक हो जाएंगी।अमेरिकी डॉलर की कमजोरी: बढ़ते अमेरिकी बजट घाटे और निवेश पोर्टफोलियो में डॉलर पर निर्भरता कम करने (डी-डॉलराइजेशन) की वैश्विक प्रवृत्ति के कारण डॉलर कमजोर हो सकता है।केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग: केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की कीमतों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है और खुदरा निवेशकों की कमजोर रुचि के दौरान भी बाजार को बड़ी गिरावट से बचा सकती है।हालांकि, स्विस विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि 5,000 डॉलर तक का सफर पूरी तरह आसान नहीं होगा। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है और ऊंची तेल कीमतें महंगाई को बढ़ाए रखती हैं, तो फेडरल रिजर्व मौद्रिक ढील (रेट कट) को टाल सकता है। ऐसी स्थिति में ट्रेजरी की वास्तविक यील्ड ऊंची बनी रहेगी और सोने के बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।