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आने वाले सप्ताह का आर्थिक कैलेंडर (Economic Calendar) अपेक्षाकृत सीमित दिखाई देता है, लेकिन आंकड़ों की कम संख्या की भरपाई उनकी महत्ता (Quality) से हो सकती है। जून में अमेरिका के निराशाजनक श्रम बाजार (Labor Market) के आंकड़ों के बाद बाजार अब फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के अगले कदमों का नए सिरे से आकलन कर रहा है। ऐसे माहौल में, कुछ ही महत्वपूर्ण व्यापक आर्थिक (Macroeconomic) आंकड़े भी EUR/USD मुद्रा जोड़ी में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव (Volatility) पैदा कर सकते हैं।
मौजूदा समय में लगभग हर महत्वपूर्ण आर्थिक रिपोर्ट बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि आने वाले आर्थिक आंकड़े यह संकेत देते हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ रही है, तो अमेरिकी डॉलर (ग्रीनबैक) पर फिर से दबाव बढ़ सकता है। वहीं, यदि आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो डॉलर को दोबारा मजबूती हासिल करने का मौका मिलेगा और बाजार फेडरल रिजर्व (Fed) की मौद्रिक नीति को लेकर अपनी उम्मीदों में बदलाव कर सकता है।
आइए, अगले सप्ताह जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर एक नजर डालते हैं।
जैसा कि सभी जानते हैं, अमेरिका का सर्विस सेक्टर उसकी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार है। यह सेक्टर विनिर्माण (Manufacturing) की तुलना में महंगाई और भू-राजनीतिक जोखिमों का बेहतर सामना करता है। मई में ISM सर्विसेज इंडेक्स अप्रत्याशित रूप से बढ़कर 54.5 पर पहुंच गया था, जिसका मुख्य कारण नए ऑर्डर और कारोबारी गतिविधियों में मजबूती थी। सोमवार, 6 जुलाई को जारी होने वाली जून की रिपोर्ट यह स्पष्ट करेगी कि मई की तेजी केवल अस्थायी थी या सर्विस सेक्टर वास्तव में मजबूत गति पकड़ रहा है।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, जून में यह इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ 54.5 से घटकर 54.2 रह सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि जून के ISM मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स ने उत्पादन वृद्धि की रफ्तार में कमी (52.2) और नए ऑर्डर में गिरावट (56.0) का संकेत दिया था। ऐसे में उम्मीद है कि सर्विस सेक्टर भी मई के उच्च स्तर के बाद अब धीरे-धीरे ठंडा पड़ सकता है।
इस रिपोर्ट में सबसे अधिक ध्यान प्राइस इंडेक्स (Price Index) पर रहेगा। मई में ईंधन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने के कारण यह इंडेक्स 71.3 तक पहुंच गया था, जो अगस्त 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। जून में इसके घटकर 68.5 रहने का अनुमान है। यदि इसमें अनुमान से अधिक गिरावट आती है, तो डॉलर पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि यही घटक लगातार बनी रहने वाली महंगाई का प्रमुख संकेतक माना जाता है।
इसके अलावा रोजगार (Employment) से जुड़ा उप-सूचकांक भी काफी महत्वपूर्ण रहेगा, खासकर जून के कमजोर नॉनफार्म पेरोल (Nonfarm Payrolls) आंकड़ों के बाद। यह उप-सूचकांक लगातार तीन महीनों से गिर रहा है और मई में 47.9 पर पहुंच गया था। जून में इसके 48.2 रहने का अनुमान है, जो अब भी संकुचन (Contraction) क्षेत्र में रहेगा। यदि यह अपेक्षा से भी अधिक कमजोर रहता है, तो डॉलर पर भारी दबाव आ सकता है क्योंकि अमेरिका में अधिकांश रोजगार सर्विस सेक्टर से ही जुड़े हैं।
बुधवार, 8 जुलाई को जून में हुई FOMC बैठक की कार्यवाही (Minutes) जारी होगी। सामान्य परिस्थितियों में यह रिपोर्ट हमेशा बाजार में बड़ी हलचल नहीं लाती, लेकिन इस बार इसका महत्व काफी अधिक है क्योंकि यह नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श (Kevin Warsh) की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक की विस्तृत जानकारी देगी।
जून की बैठक में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था, लेकिन डॉट प्लॉट (Dot Plot) ने बाजार को चौंका दिया। इसमें संकेत मिला कि वर्ष के अंत तक कम से कम एक बार ब्याज दर बढ़ाई जा सकती है, जबकि इससे पहले बाजार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहा था। केविन वॉर्श ने अपना व्यक्तिगत डॉट प्रकाशित नहीं किया, लेकिन उन्होंने फेड की पूर्वानुमान प्रणाली में सुधार के लिए एक कार्य समूह बनाने की घोषणा की।
अब बाजार यह जानना चाहेगा कि समिति के भीतर यह सख्त (Hawkish) रुख कितना सर्वसम्मत था। कितने सदस्य वास्तव में ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में थे और कितने सदस्य मौजूदा नीति को जारी रखना चाहते थे। यदि कार्यवाही में महंगाई के दोबारा बढ़ने के जोखिम का बार-बार उल्लेख मिलता है, तो इससे डॉलर को मजबूती मिल सकती है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि जून की FOMC बैठक के समय फेड के पास मई के मजबूत रोजगार आंकड़े उपलब्ध थे, जबकि अब बाजार के पास जून के कमजोर नॉनफार्म पेरोल आंकड़े भी हैं। ऐसे में निवेशक यह भी देखेंगे कि क्या समिति के सदस्यों ने रोजगार बाजार में नरमी को महंगाई कम होने का ऐसा कारण माना, जिसके चलते ब्याज दर बढ़ाने की आवश्यकता कम हो सकती है।
जून के कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद इस सप्ताह जारी होने वाले साप्ताहिक बेरोजगारी दावों (Unemployment Claims) के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण होंगे। ये आंकड़े यह बताएंगे कि अमेरिकी श्रम बाजार वास्तव में कमजोर हो रहा है या जून के नॉनफार्म पेरोल केवल एक अस्थायी गिरावट थे।
पिछले सप्ताह शुरुआती बेरोजगारी दावों (Initial Claims) की संख्या 2.15 लाख रही, जबकि अनुमान 2.25 लाख का था। इस सप्ताह अधिकांश विश्लेषकों का अनुमान 2.18 लाख का है। Verizon, Amazon और Walmart जैसी बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों की छंटनी के बावजूद यह आंकड़ा अभी भी 2.10 लाख से 2.30 लाख के आरामदायक दायरे में बना हुआ है। यदि यह इसी दायरे में रहता है, तो बाजार संभवतः इस रिपोर्ट को नजरअंदाज करेगा। लेकिन यदि यह अचानक 2.30 लाख से ऊपर चला जाता है, तो डॉलर पर भारी दबाव आ सकता है।
इससे भी अधिक चिंता का विषय Continuing Claims हैं, जो लगातार चौथे सप्ताह बढ़े हैं। इसका मतलब है कि नौकरी खोने वाले लोगों को नई नौकरी मिलने में पहले की तुलना में अधिक समय लग रहा है। पिछले सप्ताह यह आंकड़ा बढ़कर 18.14 लाख हो गया था। इस सप्ताह इसके 18.30 लाख तक पहुंचने का अनुमान है, जो लगातार पांचवें सप्ताह बढ़ोतरी को दर्शाएगा।
तकनीकी दृष्टि से EUR/USD मुद्रा जोड़ी ने 1.1325 के मध्यम अवधि के निचले स्तर से ऊपर की ओर मजबूत उछाल दिखाया है। इसके परिणामस्वरूप खरीदारों ने 1.14 के स्तर के ऊपर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे आगे और तेजी की संभावना बनी हुई है।
4-घंटे (H4) के चार्ट पर यह जोड़ी एक स्थानीय आरोही चैनल (Ascending Channel) के भीतर कारोबार कर रही है और 1.1470 के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तर को पार करने का प्रयास कर रही है। वहीं दैनिक (D1) चार्ट पर लंबे समय से चली आ रही ओवरसोल्ड (Oversold) स्थिति से सुधार दिखाई दे रहा है, लेकिन जोड़ी अभी भी व्यापक दीर्घकालिक मंदी (Bearish Trend) के भीतर बनी हुई है।
हालांकि पिछले सप्ताह खरीदारों ने कई प्रयास किए, लेकिन वे 1.1470 के प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर को पार नहीं कर सके। यह स्तर डेली चार्ट पर Bollinger Bands की मध्य रेखा और Ichimoku Kumo Cloud की ऊपरी सीमा के साथ मेल खाता है। इसलिए, लॉन्ग पोजीशन (Buy Trade) पर विचार तभी करना उचित होगा, जब EUR/USD इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल हो जाए। इसके बाद अगला महत्वपूर्ण लक्ष्य 1.1530 का क्लस्टर ज़ोन होगा, जहां डेली चार्ट की Kijun-sen लाइन, H4 की 200-पीरियड EMA और 38.2% Fibonacci Retracement स्तर एक साथ मिलते हैं।